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Kabhi kabhi...

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कभी कभी उनकी यादों में,मर मर कर जी लेते हैं, कभी आँसुओ के सागर भी हँसकर के पी लेते हैं! कभी कभी मन मे आता है,छोड़ो न अब बहुत हुआ, कभी उन्हें पाने के खातिर दृढ़ निश्चय कर लेते हैं! कभी कभी बैठे बैठे दोनों आंखे भर आती हैं, कभी काँपते होठों से भी हम थोड़ा हँस लेते हैं! कभी उलझकर प्रश्नों में जब धैर्य कहीं खो जाता है, कभी फोन पर बातें करके मन हल्का कर लेते हैं! कभी कभी मन की विह्वलता जब विचलित कर देती है, कभी कभी बैठे बैठे कुछ कविताएं लिख लेते हैं! कभी कभी तन्हाई का आलम कुछ यूँ हो जाता है, कभी भरी महफ़िल में भी हम निपट अकेले होते हैं! कभी कभी अपनों की बातें ही अनजानी सी लगतीं, कभी कभी तितली के पंखों में भी धुन सुन लेते हैं! कभी कभी विस्फारित नयनों से निश्चल जल जब बहता, कभी उसी जल से सिंचित कर प्रेम बीज बो लेते हैं! कभी वृथा में प्रणय विवश हो मन पतंग जल जाता है, कभी बिना पंखों के ही उड़कर अम्बर छू लेते हैं! #हेमन्त_राय(स्वरचित)

Tum khadi ho sath mere...

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#तुम #खड़ी #हो #साथ #मेरे,#साथी #मेरे! हर सुबह,हर दोपहर हो साथ मेरे, हर गली,कूँचे, शहर हो साथ मेरे, हर कोई छोड़े मेरा संग है मुझे स्वीकार लेकिन, चाहता बस तुम खड़ी हो साथ मेरे! तुम खड़ी हो साथ मेरे,साथी मेरे,साथी मेरे! मैं तेरा चेहरा प्रिये कब देखता हूँ, तुमको मैं अपनी ही छाया सोचता हूँ, चाहे हर दुख झेलना मुझको पड़े पर, चाहता हूँ मुस्कुराएं होंठ तेरे! तुम खड़ी हो साथ मेरे,साथी मेरे,साथी मेरे! क्यों तेरे खातिर अलग से घर बनाएँ! क्यों तेरा स्थान कोई और पाए, क्यों तुम्हे खोने का डर मुझको सताए, जानता तुम रह रही हो दिल में मेरे! तुम खड़ी हो साथ मेरे,साथी मेरे,साथी मेरे! बस तेरे ही ख्वाब दिल में बुन रहा हूँ, राह का काँटा सभी मैं चुन रहा हूँ, ना कोई कंकड़ ना काँटा हो वहाँ पर, जिस जगह पर पड़ रहे हों पाँव तेरे! तुम खड़ी हो साथ मेरे ,साथी मेरे....साथी मेरे! नेह के सागर छलकते हों कहीं पर, प्यार के मोती बिखरते हों जमीं पर, चाहता मन तुझको ले जाएं जहां पर, चांद -तारों से सजे सृंगार तेरे! तुम खड़ी हो साथ मेरे,साथी मेरे.....साथी मेरे! हर मेरी कविता ,कहानी तुम पे हो बस, ये मेर...

Vo hansi raat fir se aayegi..

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वो हँसी रात फिर से आएगी, मैं जो रूठूँ तो वो मनाएगी! वो हँसी रात..... फिर से छज्जे पे जा खड़ी होगी, फिर वहीं से वो मुस्कुराएगी! वो हँसी रात... मुझको बस देखने भर खातिर, अपना वो फेसबुक बनाएगी! वो हँसी रात.... देखकर शायरी मेरी उस पर, खुद के अहसास को वो पाएगी! वो हँसी रात.... बैठकर सामने मेरे एक दिन, मुझको खाना वही खिलाएगी! वो हँसी रात.... फिर से पागल कहूँगा मैं उसको, फिर वो आँखे मुझे दिखाएगी! वो हँसी रात... मैं जो बेवक्त सो गया फिर से, मुझको छूकर मुझे जगाएगी! वो हँसी रात... अपने घर से शहर जो जाऊँगा, बैठे आँसू वो फिर बहायेगी! वो हँसी रात... वो हँसी रात,फिर से आएगी , मैं जो रूठूँ तो वो मनाएगी! वो हँसी रात.... #स्वरचित- #हेमन्त #राय

Sath khada tha koi..!

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#साथ #खड़ा #था #कोई!(पिता जी को समर्पित) जीवन में समरसता थी, मधुता का उत्तुंग शिखर था, हर लता प्रफुल्लित,कुसुमित थी, नवकिसलय सा हर एक पहर था, हर पहर-पहर हर डगर-डगर, बस साथ चला था वो ही, स्याह अँधेरी रातो में भी साथ खड़ा था कोई! जीवन के उस पतझड़ में, जब सारे पुष्प ,पत्र सूखे थे, सारी कलियाँ मुरझाई, व हर मुक्तक जब टूट गिरे थे, तब चिरलग्न मुकुल सा मुझमें, सहज जुड़ा था वो ही! स्याह अँधेरी रातों में भी साथ खड़ा था कोई! जब तीक्ष्ण वेदना के स्वर ने, अंतर्मन को ललकारा, धीरज का वो पुल टूटा, विपरीत हुई हर धारा, बाहुबल कमजोर पड़ा,और मांगा कोई सहारा, तब जीर्ण-शीर्ण हो रही बाजुएँ थाम रहा था वो ही, स्याह अँधेरी रातों में भी साथ खड़ा था कोई! थी विकट परिस्थिति,और सघन था अंधकार, जीवन में, सब कुछ खो देने का डर था अंतर्मन में! जब रवि ने भी मुँह मोड़ा, परछाईं ने भी संग छोड़ा, हर घनघोर कुहासे से निर्भीक लड़ा था वो ही! स्याह अँधेरी रातों में भी साथ खड़ा था कोई! #स्वरचित #हेमन्त #राय फ़ोटो साभार इंटरनेट!

Tum meri ho kaun...!

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#तुम #मेरी #हो #कौन! तुम हमारे प्राण, प्रण की प्रेरणा हो, तुम हमारे काव्य की अवधारणा, प्रीत की संवेदना,अनुभूति तुम हो, तुम हो मेरे भाव की अभिव्यंजना! तुम मेरी तनहाईयों में मीत हो, तुम मेरे कोमल हृदय का गीत हो, देखो कितनी सहजता से हार जाता हूँ मैं तुमसे, तुम हमारी हार में भी जीत हो! तुम न होती आज शायद मर ही जाता, तन से जीता मैं,मगर मन जी न पाता, तुम मिली हो आज देखो हँस रहा हूँ, आँख का आँसू मैं किस-किस से छुपाता? तन मेरा तेरे बिना निष्प्राण है, कल्पना की शक्ति निर-आधार है, चाहता है मन तूँ हरदम मुस्कुराए, इस हृदय को दर्द भी स्वीकार है! तुम मेरे सूने हृदय की चेतना हो, तुम मेरे स्तब्ध मन की कल्पना, प्यार करता हूँ तुम्ही से ,बस तुम्ही से, तुम मेरे हर दर्द की हो वेदना! तुम हमारी प्राण,प्रण की प्रेरणा हो , तुम हो मेरे काव्य की अवधारणा! #स्वरचित #हेमन्त #राय

रह गयी उसकी कहानी अब अधूरी!

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#रह #गयी #उसकी #कहानी #अब #अधूरी! (शहीद सैनिक के परिवार का दर्द) खिलखिलाता था जो आँगन रो रहा है, उस भवन में आज सन्नाटा खड़ा है, छोड़कर पीछे वो अपने चल दिया है, रोती बीबी,बेटियाँ दो,माँ है बूढ़ी! रह गयी उसकी कहानी अब अधूरी, बस अधूरी! सामने जब बेटियाँ दो रो रही हों, पिता का साया वो सर से खो रही हों, पीर क्या उठती रही होगी हृदय में, सामने ही टूटी होगी उसकी चूड़ी! रह गयी उसकी कहानी अब अधूरी ,बस अधूरी! चहकता आलिंद जब सूना पड़ा हो, घर जवां बेटे का सोया शव धरा हो, क्या कभी जीने का मन उनका करे अब, लड़खड़ाता बाप और वो मां जो बूढ़ी! रह गयी उसकी कहानी अब अधूरी,बस अधूरी! माँग का सिंदूर जिसके लुट गया हो, हाथ हाथों से पती का छुट गया हो, उस हृदय की वेदना को कैसे समझें, जब नही हो बेटियों की फीस पूरी! रह गयी उसकी कहानी अब अधूरी, अब अधूरी, रह गयी उसकी कहानी बस अधूरी,बस अधूरी! #स्वरचित #हेमन्त #राय

अब बता दो क्या मेरी नहीं तुम रही!

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#अब #बता #दो #क्या #मेरी #नही #तुम #रही! तू मेरे इश्क़ से बेखबर हो गयी, मेरी बातों का तुम पर, असर तक नही, हूँ बड़े दर्द में,पूछता बस यही, अब बता दो ,क्या मेरी नही तुम रही? क्यों कभी भी मेरी याद आती नहीँ, रूठ जाऊँ अगर तुम मनाती नहीं, एक अजब सी उदासी है अब छा रही, हूँ बड़े दर्द में पूछता बस यही, अब बता दो ,क्या मेरी नहीं तुम रही? इन लबों की हँसी, है कहीं खो गयी, आंख के नीचे अब झाईयां पड़ रही, दोस्त कहते हुआ क्या बता तो सही, पहले जैसा तू अब मुस्कुराता नही, हूँ बड़े दर्द में पूछता बस यही, अब बता दो ,क्या मेरी नही तुम रही? स्वप्न भी अब मेरे बेअदब हो गए, अब वहाँ भी मुझे बस तुम्ही दिख रही, स्वर मेरे अब हैं कुछ लड़खड़ाए हुए, दर्द के गीत मेरी कलम लिख रही, इतना वाचाल मन आज खामोश है, इस विसंगति को तूँ क्यों समझती नहीं, हूँ बड़े दर्द में पूछता बस यही, अब बता दो, क्या मेरी नही तुम रही? #स्वरचित #हेमन्त #राय